
खैरागढ़। देश की प्रथम महिला शिक्षिका और महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर 10 मार्च को खैरागढ़ ब्लॉक के एक स्थानीय विद्यालय में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं राजनीतिज्ञ विप्लव साहू ने छात्र-छात्राओं के साथ मिलकर सावित्रीबाई फुले को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके जीवन संघर्षों को याद किया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विप्लव साहू ने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन की अग्रदूत थीं। उन्होंने ऐसे समय में महिलाओं की शिक्षा के लिए संघर्ष किया, जब समाज में इसका तीव्र विरोध था। उन्होंने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर भारत का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया और शिक्षा के माध्यम से समानता और न्याय का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले वास्तव में “शिक्षा की देवी” हैं, क्योंकि उन्होंने लड़कियों और वंचित समाज के लिए शिक्षा का दीप जलाया। उन्होंने भ्रूण हत्या के विरोध, बाल हत्या प्रतिबंध गृह की स्थापना, विधवा मुंडन जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाई और सत्यशोधक समाज के माध्यम से सामाजिक समानता की विचारधारा को आगे बढ़ाया। इस दौरान विद्यार्थियों के बीच शिक्षा, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक जागरूकता के महत्व पर भी चर्चा की गई। विप्लव साहू ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना नहीं, बल्कि जागरूक और संवेदनशील नागरिक बनाना है। उन्होंने विद्यार्थियों से अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और समाज में समानता व न्याय के मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने सावित्रीबाई फुले के जीवन और उनके संघर्षों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

