डोंगरगढ़।सोन कुमार सिन्हा - मां बम्लेश्वरी की नगरी और प्रदेश के प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्र डोंगरगढ़ में अवैध रूप से संचालित लॉजों और किराए के कमरों को लेकर नागरिकों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि शहर के कई इलाकों, विशेषकर कालकापारा क्षेत्र में बिना वैधानिक अनुमति के मकानों और भवनों में लॉज जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, जिससे कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और शहर की प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार डोंगरगढ़ में करीब 40 लॉज पंजीकृत हैं जिनका रिकॉर्ड प्रशासन के पास उपलब्ध है और उनका संचालन निर्धारित नियमों के तहत किया जाता है। लेकिन इसके अलावा कई ऐसे भवन भी बताए जा रहे हैं जहां बिना पंजीयन और आवश्यक अनुमति के कमरों को किराए पर दिया जा रहा है। आरोप है कि इन स्थानों पर ठहरने वाले लोगों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं।
कालकापारा बना चिंता का केंद्र
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कालकापारा क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां सबसे अधिक देखने को मिल रही हैं। कई मकानों में कमरों को कथित तौर पर लॉज की तरह उपयोग किया जा रहा है। इससे आसपास रहने वाले परिवारों को असुविधा हो रही है और सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है।
धार्मिक नगरी की छवि पर असर की आशंका
शहर के वरिष्ठ नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है कि डोंगरगढ़ केवल एक शहर नहीं बल्कि प्रदेश की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु मां बम्लेश्वरी मंदिर, चंद्रगिरी, प्रज्ञागिरी, जटाशंकर मंदिर, शिवधाम पर्वत और सतनाम पहाड़ जैसे धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि अवैध गतिविधियों पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो शहर की छवि प्रभावित हो सकती है।
संयुक्त जांच अभियान की मांग
छत्तीसगढ़ सरकार सेवा कल्याण परिषद सहित कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मांग की है कि नगर पालिका, पुलिस, राजस्व विभाग और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित कर शहरभर में विशेष जांच अभियान चलाया जाए। जांच के दौरान भवन स्वामियों के दस्तावेज, व्यवसायिक अनुमति, आगंतुकों का रिकॉर्ड और सुरक्षा मानकों की पड़ताल की जाए। अनियमितता मिलने पर संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक सतर्कता जरूरी
नागरिकों का कहना है कि नियमित निरीक्षण, सत्यापन और निगरानी व्यवस्था से अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाले डोंगरगढ़ की गरिमा बनाए रखने के लिए इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।

