रायपुर। सोन कुमार सिन्हा - धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान हमेशा खेती-किसानी, मेहनतकश किसानों और समृद्ध ग्रामीण संस्कृति से रही है। लेकिन हाल के दिनों में जिस तरह एक के बाद एक अवैध गतिविधियों के मामले सामने आ रहे हैं, उसने प्रदेश की छवि और अस्मिता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दारू तस्करी, अवैध खनन, जमीन घोटाले और जंगलों की कटाई जैसे मामलों के बीच अब दुर्ग जिले से सामने आई अफीम की खेती की खबर ने पूरे प्रदेश को चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि एक भाजपा नेता के खेत में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही थी, जिसका खुलासा अचानक उस समय हुआ जब होली के पर्व के दौरान गांव के कुछ युवक खेतों में लकड़ी इकट्ठा करने पहुंचे। ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरा के अनुसार होली जलाने के लिए युवा खेतों और आसपास के इलाकों से लकड़ियां इकट्ठा करते हैं और कई बार चना या गेहूं की बालियों को तोड़कर होरा भी भूनते हैं। लेकिन इस बार जब युवक एक खेत में पहुंचे तो वहां मक्के या दूसरी फसलों की जगह अफीम की फसल लहलहाती दिखी। पहले तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ लेकिन युवाओं ने सूझबूझ दिखाते हुए खेत की फोटो और वीडियो बना ली जो देखते ही देखते गांव से शहर और फिर पूरे प्रदेश में वायरल हो गई। इसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में आ गया और छत्तीसगढ़ में अब तक की सबसे बड़ी अफीम खेती के खुलासे के रूप में सामने आया। बताया जा रहा है कि यह खेती छोटे स्तर पर नहीं बल्कि करोड़ों रुपए के अवैध कारोबार से जुड़ी हो सकती है। अफीम की खेती कोई साधारण प्रक्रिया नहीं होती खेत तैयार करने से लेकर फसल तैयार होने तक लंबा समय और व्यवस्थित व्यवस्था की जरूरत होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े स्तर पर खेती होने के बावजूद शासन-प्रशासन को इसकी भनक तक कैसे नहीं लगी। ग्रामीणों का कहना है कि एक छोटे किसान की जमीन का भी कई बार गिरदावरी और निरीक्षण होता है, लेकिन अगर सैकड़ों एकड़ जमीन पर अफीम की खेती हो जाए और जिम्मेदार अधिकारी पटवारी, आरआई और तहसील स्तर तक इसे न देख पाएं तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही या संगठित अपराध की ओर इशारा करता है। इस मामले को लेकर पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। कई लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्षता के लिए इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह खेती कब से चल रही थी और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। वहीं जिस साहस के साथ गांव के युवाओं ने रात के समय खेत में जाकर इसकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर पूरे मामले का पर्दाफाश किया उसकी भी सराहना हो रही है। कई लोगों का मानना है कि राज्य सरकार को इन युवाओं को सम्मानित कर वीरता पुरस्कार देना चाहिए, क्योंकि उनके साहस से ही इतने बड़े अवैध कारोबार का खुलासा हो सका।
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