रायपुर। प्रदेश के मछुआरा समाज के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को लेकर रायपुर में आयोजित महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में नवीन मछुआरा नीति 2022-23 के प्रभावी क्रियान्वयन, मत्स्य पालन अधिकारों, जलाशयों के प्रबंधन और मछुआरों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में मछुआरा बोर्ड के प्रदेश उपाध्यक्ष लखनलाल धीवर, प्रदेश संयोजक प्रदीप कैवर्त, विभागीय वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में प्रदेशभर में मछुआरा नीति के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार मछुआरा समाज को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से लागू की गई नीति के माध्यम से मछुआरों को जलाशयों में मत्स्य पालन के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
पट्टा वितरण और मत्स्य पालन अधिकारों पर विशेष चर्चा
समीक्षा बैठक में जलाशयों के प्रबंधन, मत्स्य पालन अधिकारों, पट्टा वितरण व्यवस्था और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की रणनीतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। प्रतिनिधियों ने मांग उठाई कि जलाशयों के पट्टों के वितरण में स्थानीय मछुआरा समितियों को प्राथमिकता दी जाए ताकि वास्तविक हितग्राहियों को लाभ मिल सके। अधिकारियों ने सुझावों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
दुर्ग संभाग के प्रतिनिधियों ने रखीं जमीनी समस्याएं
बैठक में विशेष रूप से आमंत्रित ईश्वर निषाद और दिनेश निषाद, जिला सह-संयोजक (मछुआरा प्रकोष्ठ), राजनांदगांव ने मछुआरा समाज की जमीनी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में मत्स्य पालन अधिकारों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है, जिससे मछुआरों को परेशानी होती है। उन्होंने पंचायत स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने और नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।
युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार और तकनीकी प्रशिक्षण
बैठक में मछुआरा समाज के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से मत्स्य उत्पादन और आय में वृद्धि संभव है। इसके लिए युवाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जाएगा। साथ ही मत्स्य बीज उत्पादन, मछली पालन, प्रसंस्करण और विपणन के क्षेत्र में नए अवसर विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई।
मछुआरों की समस्याओं का होगा समयबद्ध समाधान
प्रदेश उपाध्यक्ष लखनलाल धीवर ने कहा कि मछुआरा समाज ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनके हितों की रक्षा शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों से मछुआरों की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने की अपील की।
वहीं प्रदेश संयोजक प्रदीप कैवर्त ने शासन और समाज के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि जमीनी स्तर की समस्याओं और सुझावों को विभाग तक नियमित रूप से पहुंचाना आवश्यक है, तभी नीति के उद्देश्य पूरी तरह सफल हो सकेंगे।
मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम पहल
बैठक के समापन पर अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि प्राप्त सुझावों पर सकारात्मक पहल की जाएगी और मछुआरा समाज के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। माना जा रहा है कि यह समीक्षा बैठक मछुआरों के अधिकारों की सुरक्षा, मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

