खैरागढ़। जिला पंचायत के पूर्व सभापति और कांग्रेस नेता विप्लव साहू 40 दिनों के लंबे असम प्रवास के बाद वापस लौटे हैं। इस दौरान उन्होंने अपर असम और बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन के लगभग 20 विधानसभा क्षेत्रों में बतौर ट्रेनर और ऑब्जर्वर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। उनके इस प्रवास को कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। साहू ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक प्रशिक्षित करते हुए चुनावी रणनीति को धार दी। उन्होंने स्थानीय नेतृत्व के साथ समन्वय बनाकर संगठन को सक्रिय और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि मजबूत बूथ मैनेजमेंट और प्रशिक्षित कार्यकर्ता ही चुनावी सफलता की कुंजी हैं। असम के सामाजिक-आर्थिक हालात पर भी उन्होंने गंभीर चिंता जताई। खासकर चाय बागान क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों की स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि गरीबी बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बड़ा मुद्दा है। ऐसे हालात में कांग्रेस की जनकल्याणकारी नीतियां लोगों के बीच उम्मीद जगा सकती हैं। राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ असम की सांस्कृतिक विविधता ने भी उन्हें प्रभावित किया। बीहू की जीवंतता, लोक संगीत और पारंपरिक नृत्यों के बीच उन्होंने लोगों की सक्रिय भागीदारी को नजदीक से देखा। बोडोलैंड का बागुरुम्बा, चाय जनजाति का झुमोइर और मिसिंग समुदाय का पारंपरिक नृत्य उनके अनुभव का खास हिस्सा रहा। विप्लव साहू ने अपने इस प्रवास को सीख और अनुभव से भरपूर बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय महासचिव भूपेश बघेल, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, विनोद वर्मा और विकास उपाध्याय के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के अनुभव संगठन को मजबूत करने और आने वाले चुनावों में बेहतर प्रदर्शन की दिशा तय करने में सहायक होते हैं।
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