रायपुर।सोन कुमार सिन्हा- छत्तीसगढ़ के 5 लाख से अधिक शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारजनों के लिए 9 जून की कैबिनेट बैठक बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। लंबे समय से कर्मचारियों की प्रमुख मांग रही कैशलेस चिकित्सा योजना को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक के एजेंडे में शामिल किए जाने की संभावना है। यदि योजना को मंजूरी मिलती है तो प्रदेश के लाखों कर्मचारी बिना अग्रिम भुगतान किए सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार करा सकेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने कर्मचारी हितों को प्राथमिकता देते हुए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा प्रस्तुत संकल्प बजट में इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। इससे कर्मचारियों को इलाज के लिए होने वाले भारी आर्थिक बोझ से राहत मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार योजना के तहत प्रदेश के प्रमुख निजी और सरकारी अस्पतालों को एम्पैनल किया जाएगा, जहां कर्मचारियों और उनके आश्रितों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। कैंसर, हृदय रोग, किडनी डायलिसिस सहित अन्य गंभीर और महंगे उपचार भी योजना के दायरे में शामिल किए जा सकते हैं। अब तक कर्मचारियों को इलाज के बाद प्रतिपूर्ति (रीइंबर्समेंट) के लिए लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। कैशलेस व्यवस्था लागू होने पर यह परेशानी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी और आपात स्थिति में तत्काल इलाज संभव हो सकेगा। योजना की संभावित प्रमुख विशेषताएं 5 लाख से अधिक शासकीय कर्मचारी एवं उनके आश्रित होंगे लाभान्वित। प्रारंभिक संचालन के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान। निजी एवं सरकारी एम्पैनल अस्पतालों में कैशलेस उपचार। कैंसर, हृदय रोग, डायलिसिस सहित गंभीर बीमारियों का इलाज शामिल होने की संभावना। रीइंबर्समेंट की जटिल प्रक्रिया से मुक्ति। आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल उपचार की सुविधा। छत्तीसगढ़ कैशलेस चिकित्सा सेवा कर्मचारी कल्याण संघ की प्रदेश अध्यक्ष उषा चंद्राकर ने कहा कि यह कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग है। आज के समय में गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे कर्मचारी और उनके परिवार आर्थिक दबाव का सामना करते हैं। योजना लागू होने से लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि कैबिनेट से मंजूरी मिलती है तो यह फैसला कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।प्रदेश के लाखों कर्मचारी और उनके परिवार 9 जून की कैबिनेट बैठक की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। यदि सरकार इस योजना को हरी झंडी देती है तो यह छत्तीसगढ़ के कर्मचारी कल्याण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी।
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