कर्मचारियों द्वारा मानसिक उत्पीडन, अनुचित कार्यभार, प्रशासनिक पक्षपात एवं विश्वविद्यालय के विकास में बाधा डालने का लगाया जा रहा आरोप
पूर्व में कर्मचारियों द्वारा की गई मांगों को पूर्ण करने में भी बाधा उत्पन्न करने का लगा आरोप
खैरागढ़. लगभग सात माह पहले इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में पदस्थ हुए कुलसचिव की कार्यशैली से परेशान विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने कुलपति सहित एसपी व कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया है कि हमारा उद्देश्य विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाना नहीं, बल्कि उसे संविधान, कानून एवं शैक्षणिक मूल्यों के अनुरूप सुरक्षित रखना है। भारतीय संविधान समानता का अधिकार, निष्पक्ष प्रशासन तथा गरिमापूर्ण जीवन, मानसिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षित कार्यस्थल का अधिकार सुनिश्चित करता है। इसके अतिरिक्त, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 तथा प्रचलित न्याय के सिद्धान्तों के साथ माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित निर्णय स्पष्ट करते हैं कि किसी भी कर्मचारी के साथ मानसिक उत्पीडन, अपमानजनक व्यवहार अथवा पक्षपात कानूनन अस्वीकार्य है। कर्मचारियों ने बताया है कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में गंभीर एवं चिंताजनक परिस्थितियों उत्पन्न हो गई हैं जिनमें विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों, विशेषतः प्रभारी कुलसचिव डॉ.सौमित्र तिवारी एवं सहायक कुलसचिव राजेश गुप्ता द्वारा कर्मचारियों के साथ निरंतर मानसिक उत्पीडन, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, धमकीपूर्ण भाषा का प्रयोग तथा निजी स्तर पर भय का वातावरण बनाना। कर्मचारियों पर अनुचित एवं असंगत कार्यभार थोपना, बिना पद, नियम अथवा कार्य-विवरण के अनुरूप जिम्मेदारियों देना श्रम कानूनों के विरुद्ध है। इस विश्वविद्यालय के स्थापित सेवा नियमों के विपरीत विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद का दायित्व ग्रहण किया गया। विश्वविद्यालय के आंतरिक बिल सुरक्षित नहीं रह रहे है, सामान्य जन तक पहुंच रहे हैं। कुलसचिव के द्वारा पूर्व में किए गए आश्वासन का आज दिनांक तक पालन नहीं किया गया। अधूरी, भ्रामक एवं तथ्यों से रहित सूचनाओं के आधार पर जनप्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय के विरूद्ध उकसाना, जिससे विश्वविद्यालय का शांतिपूर्ण, शैक्षणिक एवं विकासोन्मुख वातावरण प्रभावित हो रहा है। राजेश गुप्ता सहायक कुलसचिव के द्वारा समय-समय पर गाली-गलौज, दुर्व्यवहार के कारण विश्वविद्यालय का सौहार्दपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण नष्ट होना। कुलसचिव द्वारा फाइलों को जानबूझकर कई बार लंबित रखना, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली याधित हो रही है और विश्वविद्यालय का विकास अवरुद्ध हो रहा है। प्रभारी कुलसचिव द्वारा स्वयं को 'रजिस्ट्रार / कुलसचिव" कहलाने हेतु दबाव बनाना, जो प्रशासनिक मर्यादा एवं विधिक व्यवस्था के विपरीत है। कर्मचारियों के विरुद्ध पीठ पीछे षड्यंत्र, बदनामी एवं भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करना एवं वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष कर्मचारियों की छवि खराब करना।कुलसचिव द्वारा पक्षपातपूर्ण एवं दुर्भावनापूर्ण निर्णय, जिससे कर्मचारियों में असुरक्षा, तनाव एवं मानसिक अवसाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
कुलसचिव के विरुद्ध जल्द हड़ताल पर जा सकते है कर्मचारी
गैर शिक्षक कर्मचारी संघ द्वारा पूर्व में विभिन्न मांगों के संबंध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की गई थी। जिसके संबंध में विभिन्न मांगों पर इस आशय के साथ हड़ताल स्थगित किया गया था जिसमें अधिकारियों द्वारा दिनांक नियमानुसार पत्राचार किया जाकर पूर्ण कर दिया जावेगा। उक्त मांगो को कुलपति के द्वारा पूर्ण करने हेतु पहल कर दी गई है परंतु कुलसचिव के द्वारा मांगों को पूर्ण करने को लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही है जिसके कारण कर्मचारियों की मांगे पूरी नहीं हो पा रही है। कुलसचिव के कार्यशैली से परेशान कर्मचारियों का कहना है कि अगर जल्द ही इस मामले में कोई सार्थक कार्यवाही नहीं हुई तो वे हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।

