खैरागढ़ । पंचायतों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके पति परिजन या अन्य लोगों द्वारा कामकाज संचालित किए जाने की बढ़ती शिकायतों पर अब सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं में किसी भी प्रकार का प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. सरकार ने माना है कि पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व नहीं बल्कि महिलाओं की वास्तविक भागीदारी, नेतृत्व क्षमता और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना है. ऐसे में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके रिश्तेदारों का बैठकों में शामिल होना या निर्णय लेना नियमों के विपरीत माना जाएगा.
बैठकों में महिला प्रतिनिधियों की वास्तविक मौजूदगी होगी अनिवार्य
जारी निर्देशों के अनुसार अब पंचायत बैठकों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। उनके स्थान पर किसी रिश्तेदार या अन्य व्यक्ति की भागीदारी पर रोक रहेगी। जरूरत पड़ने पर फेस रिकॉग्निशन और बायोमीट्रिक अटेंडेंस जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगी हर कार्यवाही
सरकार ने पंचायत एवं ग्राम सभा की कार्यवाही को सभासार पोर्टल, निर्णय ऐप या अन्य अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि महिला प्रतिनिधि स्वतंत्र रूप से निर्णय ले रही हैं और उनकी सहभागिता केवल नाममात्र की नहीं है।
महिला प्रतिनिधियों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान
महिला जनप्रतिनिधियों को अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिले में जेंडर सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम, नेतृत्व प्रशिक्षण और जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही पंचायतों में सक्रिय भूमिका निभाने वाली महिलाओं की सफलता की कहानियों को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्रचारित किया जाएगा, ताकि अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिल सके।
पेसा क्षेत्रों में महिला सभा होगी अनिवार्य
पेसा क्षेत्र की पंचायतों में ग्राम सभा से पहले महिला सभा आयोजित करना अनिवार्य किया गया है। वहीं सामान्य क्षेत्रों में भी महिला प्रतिनिधियों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने के लिए महिला सभा आयोजित करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा।
शिकायत पेटी और निगरानी तंत्र बनेगा
प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व की शिकायतों पर कार्रवाई के लिए जिला जनपद और ग्राम पंचायत स्तर पर शिकायत पेटी एवं प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा. सरकार ने सभी अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की स्वतंत्र और प्रभावी भागीदारी को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानने के निर्देश दिए हैं. साथ ही एक सप्ताह के भीतर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने और हर माह की 5 तारीख तक नियमित जानकारी भेजने को कहा गया है.

