खैरागढ़। नीलेश कुमार - विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाकर चर्चा में आए बैहाटोला माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक किशोर शर्मा पर विभागीय जांच ने उल्टा ही शिकंजा कस दिया। जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद संयुक्त संचालक ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर कवर्धा जिले के सहसपुर लोहारा बीईओ कार्यालय में अटैच कर दिया है। जानकारी के अनुसार हाल ही में राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित हुए किशोर शर्मा ने बीईओ नीलम सिंह राजपूत पर कार्यशैली को लेकर सवाल उठाते हुए मानसिक प्रताड़ना और वेतन रोकने जैसे आरोप लगाए थे। हालांकि विभागीय जांच में मामला पूरी तरह उलट पाया गया। जांच में सामने आया कि किशोर शर्मा लंबे समय से शाला संचालन में लापरवाही बरत रहे थे। समय पर स्कूल न पहुंचना बिना सूचना अनुपस्थित रहना विभागीय कार्यों में ढिलाई और मध्याह्न भोजन योजना में अनियमितता जैसे गंभीर आरोप पहले से ही उनके खिलाफ दर्ज थे।
मध्याह्न भोजन में बड़ा खेल उजागर
20 नवंबर को एबीईओ किशोरीलाल अमेला के निरीक्षण के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। शाला की दर्ज संख्या 141 थी उपस्थिति रजिस्टर में 113 छात्रों की एंट्री दर्ज थी, जबकि मध्याह्न भोजन 136 बच्चों के नाम पर बनाकर पोर्टल में अपलोड किया गया। मौके पर मात्र 58 छात्र उपस्थित पाए गए। यह स्पष्ट रूप से योजनागत गड़बड़ी और आंकड़ों में हेरफेर का मामला माना गया।
नोटिस का जवाब भी बना विवाद का कारण
इससे पहले भी मूल्यांकन कार्य में लापरवाही को लेकर उन्हें नोटिस जारी किया गया था, जिसका जवाब उन्होंने विभागीय प्रक्रिया का पालन करने के बजाय व्हाट्सएप ग्रुप में देकर गोपनीयता नियमों की अनदेखी की। इस आचरण को भी विभाग ने गंभीरता से लिया।
पुरस्कार चयन पर भी उठे थे सवाल
किशोर शर्मा के राज्यपाल पुरस्कार चयन को लेकर शिक्षक संघ ने पहले ही विरोध दर्ज कराया था। बिना मैदानी सत्यापन के चयन किए जाने पर सवाल उठे थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें सम्मान मिल गया।
बीईओ पर दबाव बनाने की कोशिश पड़ी भारी
सूत्रों के अनुसार पुरस्कार मिलने के बाद किशोर शर्मा ने बीईओ पर आरोप लगाकर विभाग में दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन जांच में उनके ही कृत्य उजागर हो गए। विभाग ने इसे कर्तव्य के प्रति लापरवाही स्वेच्छाचारिता और गंभीर कदाचार मानते हुए सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कार्रवाई की। इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि आरोप लगाने से पहले खुद का दामन साफ होना जरूरी है वरना जांच की आंच में सच्चाई सामने आने में देर नहीं लगती।

