खैरागढ़। खैरागढ़-राजनांदगांव के बीच लगभग 90 करोड़ रुपये की लागत से बन रही 30.40 किमी लंबी सड़क निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, जिससे यह सड़क भविष्य में प्रतिदिन गुजरने वाले 20 से 25 हजार वाहनों का दबाव झेलने में सक्षम नहीं होगी। जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण जीएसबी (ग्रेन्युलर सब बेस) और डब्ल्यूएमएम (वेट मिक्स मैकडम) परतों में मापदंडों की अनदेखी की जा रही है। जीएसबी की 200 एमएम परत में मुरुम की जगह मिट्टी उपयोग करने की शिकायत सामने आई है, जिससे सड़क की नींव कमजोर होने का खतरा है। वहीं, 250 एमएम डब्ल्यूएमएम परत में भी मटेरियल और मोटाई को लेकर लापरवाही की बात कही जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन शुरुआती परतों में गड़बड़ी होती है तो ऊपर की 5 सेंटीमीटर डामर परत भी अधिक समय तक टिकाऊ नहीं रह पाएगी और सड़क की उम्र आधी हो सकती है। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी सामने आई है। सड़क पर संकेतक और बैरिकेडिंग की कमी के चलते दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में टेकापार खुर्द के 20 वर्षीय युवक की जान इसी लापरवाही के कारण चली गई। वहीं, धूल के गुबार के कारण भी आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। करीब 19 माह में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट की गति भी धीमी बताई जा रही है। निर्माण कार्य अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ था, जिसे मई 2027 तक पूरा किया जाना है। ठेकेदार को पांच साल की परफॉर्मेंस गारंटी भी देनी होगी. लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.के. चौरसिया ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ताओं को किसी भी हिस्से में जाकर लेयर की जांच कराने की खुली छूट है।
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