डोंगरगढ़ | सोन कुमार सिन्हा - शारीरिक दिव्यांगता को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने देने वाले डोंगरगढ़ निवासी ऋषि मिश्रा आज योग, प्राणायाम और समाजसेवा के दम पर हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। अस्थि बाधित (ऑर्थोपेडिक दिव्यांग) होने के बावजूद उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सकारात्मक सोच से यह साबित कर दिया कि इच्छाशक्ति के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। ऋषि मिश्रा बताते हैं कि जीवन में कई कठिन दौर आए, लेकिन योग और प्राणायाम ने उन्हें नई ऊर्जा, आत्मबल और मानसिक मजबूती प्रदान की। नियमित अभ्यास से उनके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ, तनाव कम हुआ और जीवन के प्रति आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा। इस प्रेरणादायी सफर में उनकी पत्नी श्रेया मिश्रा हर कदम पर उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं। दोनों पति-पत्नी प्रतिदिन योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करते हैं तथा लोगों को स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
योग केवल व्यायाम नहीं, जीवन जीने की कला है
ऋषि मिश्रा का मानना है कि योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाली वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक पद्धति है। उन्होंने विशेष रूप से दिव्यांगजनों से अपील की कि वे अपनी परिस्थितियों से हार न मानें, बल्कि योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।
योग के साथ समाजसेवा का भी मजबूत संकल्प
योग प्रचार-प्रसार के साथ-साथ ऋषि मिश्रा राष्ट्रीय पैरा स्पोर्ट्स खिलाड़ी भी हैं। वे वर्षों से दिव्यांगजनों को शासकीय एवं गैर-शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।
उनकी उल्लेखनीय सामाजिक सेवाओं के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। इनमें उम्मीद फाउंडेशन (जयपुर), दिव्यांग साथी ट्रस्ट (मेरठ), छत्तीसगढ़ दिव्यांग अधिकारी-कर्मचारी संघ, दिव्यांग कल्याण समिति (मेरठ) तथा समाज कल्याण विभाग, राजनांदगांव प्रमुख हैं। दिव्यांगजनों के हित में उत्कृष्ट कार्य करने पर उन्हें छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष के हाथों भी सम्मान प्राप्त हो चुका है।
समाज के लिए प्रेरणा
सामाजिक कार्यकर्ताओं और योग साधकों का कहना है कि ऋषि और श्रेया मिश्रा की जीवन यात्रा इस बात का सशक्त उदाहरण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, नियमित साधना और सकारात्मक सोच के बल पर किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। आगामी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भी यह दम्पत्ति विभिन्न योग जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उनका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को योग, प्राणायाम और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़कर एक स्वस्थ, आत्मविश्वासी और सकारात्मक समाज का निर्माण करना है।

