खैरागढ़। केसीजी जिले के तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों में आ गई है। अधिवक्ताओं और पक्षकारों ने नायब तहसीलदार न्यायालय की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि एक प्रकरण में अनावेदक का पक्ष सुने बिना आदेश पारित कर दिया गया जिससे संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला और उसे जेल जाना पड़ा। कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन विरुद्ध रामहु एवं अन्य पांच प्रकरण में न्यायालय द्वारा अनावेदक को सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए बिना आदेश जारी कर दिया गया। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित अधिवक्ता ने जमानत आवेदन तैयार करने के लिए न्यायालय जाने की जानकारी कार्यालय कर्मचारी पदमाकर राव को दी थी इसके बावजूद आदेश पारित कर दिया गया. शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जमानत संबंधी मामलों में कथित रूप से ₹5,000 की मांग की जाती है। साथ ही यह भी कहा गया कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत इस्थगासा (इस्तगासा) क्रमांक न तो अनावेदकों को दिखाया गया और न ही उसकी प्रति उपलब्ध कराई गई जिससे उन्हें यह तक पता नहीं चल सका कि शिकायत किसने और किन आधारों पर की थी. अधिवक्ता संतु साहू ने दावा किया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनके अनुसारnग्राम मरकामटोला से जुड़े मामलों में भी इसी तरह की स्थिति बनी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ₹5,000 की मांग पूरी नहीं होने पर जेल भेजने का आदेश पारित कर दिया गया। उनका यह भी कहना है कि नायब तहसीलदार न्यायालय में अधिवक्ताओं की बात नहीं सुनी जाती और उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाता।
वहीं संतोष मरावी ने आरोप लगाया कि लक्षना गांव के एक फौती नामांतरण प्रकरण में भी पहले पैसे देने की बात कही गई थी। उनका कहना है कि कार्यालय के अधिकांश कार्य कथित रूप से एक कर्मचारी के माध्यम से संचालित होते हैं जिससे तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की छवि प्रभावित हो रही है। राव बाबू के खिलाफ विभिन्न मामलों में शिकायतें किया गया है। सक्षम अधिकारियों द्वारा हर बार जांच का हवाला देते हुए कार्रवाई को टाल दिया जाता है जिससे राव बाबू को बचाने का प्रयास किए जाने की आशंका व्यक्त होती है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है ताकि तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
इन आरोपों पर जब नायब तहसीलदार भूपेंद्र नेताम से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले में कोई वर्जन नहीं बनता।
मामले की जानकारी मिलने पर केसीजी कलेक्टर इंद्रजीत चंद्रवाल ने इसे गंभीरता से लिया और अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश देने की बात कही।

