खैरागढ़। जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत कोड़ेगांव में शासकीय तालाब से बड़े पैमाने पर मिट्टी उत्खनन का मामला सामने आया है। आरोप है कि तालाब से जेसीबी और हाइवा के जरिए निकाली जा रही मिट्टी का उपयोग सरपंच परिवार की निजी कृषि भूमि के समतलीकरण में किया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद पंचायत की पारदर्शिता, सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार शासकीय तालाब से पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों ट्रिप मिट्टी निकाली जा चुकी है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा कार्य जिला मुख्यालय के बेहद नजदीक होने के बावजूद खुलेआम चलता रहा लेकिन संबंधित विभागों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि तालाब ग्राम पंचायत की सार्वजनिक संपत्ति है, तो उसकी मिट्टी का सबसे बड़ा लाभ किसी एक परिवार को कैसे मिल रहा है? मौके पर निकाली गई मिट्टी को सरपंच परिवार की निजी भूमि में डाले जाने की चर्चा पूरे क्षेत्र में है। इससे यह बहस तेज हो गई है कि कहीं पंचायत प्रस्ताव की आड़ में सार्वजनिक संसाधनों का निजी उपयोग तो नहीं हो रहा।विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून से ठीक पहले तालाब में बड़े पैमाने पर मिट्टी निकासी से उसकी मूल संरचना और जल संग्रहण क्षमता प्रभावित हो सकती है। यदि वैज्ञानिक तरीके और विभागीय अनुमति के बिना खुदाई की गई है तो भविष्य में इसका असर ग्रामीणों के जल स्रोत पर भी पड़ सकता है।जानकारों का कहना है कि केवल पंचायत प्रस्ताव पारित कर देना पर्याप्त नहीं है। शासकीय संपत्ति से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकासी की स्थिति में संबंधित विभागों की अनुमति, अभिलेख, मात्रा का रिकॉर्ड और पारदर्शी प्रक जरूरी होती है। यदि पंचायत का दावा है कि "कोई भी ग्रामीण मिट्टी ले सकता है", तो यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि अब तक कितने ग्रामीणों ने मिट्टी ली, कितनी मात्रा में ली और इसका लाभ किसे-किसे मिला. जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर लगातार जेसीबी और हाइवा से मिट्टी परिवहन होता रहा, लेकिन खनिज विभाग की ओर से कोई कार्रवाई सामने नहीं आई। इससे विभागीय निगरानी और जवाबदेही पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं। यदि उत्खनन वैधानिक है तो उसकी स्वीकृति सार्वजनिक होनी चाहिए, और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई अपेक्षित है।
धनश्याम साहू, सरपंच ग्राम पंचायत कोड़ेगांव
शासकीय तालाब में मछली पालन के उद्देश्य से खनन कराया जा रहा है। ग्राम पंचायत का प्रस्ताव पारित है तथा कोई भी ग्रामीण वहां से मिट्टी ले सकता है।
बबलू पांडेय, खनिज अधिकारी
मामले की जानकारी और वीडियो प्राप्त हुए हैं। मौके पर जांच कराई जाएगी।

