बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पटवारियों से रेवेन्यू इंस्पेक्टर (आरआई) पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित विभागीय प्रमोशन परीक्षा को रद्द कर दिया है। इस परीक्षा के माध्यम से 216 पटवारियों को आरआई पद पर पदोन्नत किया गया था। कोर्ट ने चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं, पक्षपात और भाई-भतीजावाद के संकेत पाए हैं। जस्टिस एन.के. व्यास की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जिस तरह से प्रमोशन परीक्षा आयोजित की गई, उससे उसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में अपनाई गई प्रणाली संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
प्रशिक्षण पर भी रोक
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जिन पटवारियों को इस परीक्षा के माध्यम से आरआई पद पर प्रमोट किया गया है, उन्हें फिलहाल रेवेन्यू इंस्पेक्टर जैसे प्रोफेशनल पद के लिए प्रशिक्षण पर नहीं भेजा जा सकता। कोर्ट के अनुसार, संदिग्ध चयन प्रक्रिया के आधार पर किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई उचित नहीं होगी।
लंबे समय से चल रहा था विवाद
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में पटवारियों को आरआई बनाए जाने को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ था। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया कि प्रमोशन परीक्षा में नेपोटिज्म, फेवरिटिज्म और नियमों की अनदेखी की गई। कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन हुआ।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि परीक्षा प्रक्रिया से समान अवसर और निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। चयन प्रक्रिया में भेदभाव और अनियमितताओं के स्पष्ट संकेत मिलने के कारण पूरी परीक्षा संदेह के घेरे में आ गई है।
नई परीक्षा कराने के निर्देश
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पटवारी से रेवेन्यू इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति के लिए नई विभागीय परीक्षा आयोजित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि नई परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप हो, ताकि चयन प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे।

