राजनांदगांव। सोन कुमार सिन्हा -जब कलम पर हमला होता है तो केवल एक पत्रकार नहीं बल्कि लोकतंत्र की आवाज़ घायल होती है। यदि सच लिखने और समाज के सवाल उठाने वालों को ही भय के साए में जीना पड़े तो यह केवल पत्रकारों का नहीं पूरे समाज का संकट है। कानून का राज तभी मजबूत माना जाएगा जब अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो उसे शीघ्र न्याय के कठघरे तक पहुंचाया जाए। पत्रकारों की सुरक्षा केवल एक वर्ग की मांग नहीं बल्कि लोकतंत्र की गरिमा और जनता के अधिकारों की रक्षा का प्रश्न है। घायल केवल दो पत्रकार नहीं हुए बल्कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी लहूलुहान हुआ है। अब सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं बल्कि न्याय सुरक्षा और कानून के सम्मान का है। शहर में दो पत्रकारों पर हुए कथित जानलेवा हमले ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से जुड़े लोग ही सड़कों पर सुरक्षित नहीं हैं तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है। घटना के बाद पत्रकारों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है तथा शासन-प्रशासन से त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की जा रही है। गुरुवार देर रात लखोली चौक के पास पत्रकार सौरभ ताम्रकार और योगेश साहू को कथित रूप से एक तेज रफ्तार ब्रेजा कार ने टक्कर मार दी। आरोप है कि टक्कर के बाद चालक वापस लौटा और दोनों पर हमला करने का प्रयास किया। घटना में सौरभ ताम्रकार गंभीर रूप से घायल होकर आईसीयू में भर्ती हैं जबकि योगेश साहू का उपचार जारी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी गंभीर घटना के बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों है? क्या अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो गया है? क्या ऐसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस तंत्र पर्याप्त रूप से सक्रिय है? इन सवालों का जवाब आम जनता भी जानना चाहती है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि पत्रकार केवल खबरें नहीं लिखते बल्कि समाज की आवाज़ बनते हैं। यदि उन्हीं पर हमले होंगे और दोषियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होगी तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। जनता की मांग है कि प्रशासन इस मामले को केवल एक सामान्य सड़क दुर्घटना मानकर न छोड़े। यदि जांच में जानबूझकर हमला करने के आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित लागू कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में पत्रकारों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। नगर पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव अलेक्जेंडर कीरो के अनुसार, मामले की जांच के बाद वाहन चालक परेश गोलछा के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की गई है।
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